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National Daughters Day: राष्ट्रीय बेटी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

National Daughters Day: (डॉटर्स डे) National Daughters Day जैसा कि आप जानते होंगे 25 सितंबर को डॉटर्स डे है। आज कुछ साल पहले हमारे भारतवर्ष में लड़कियों की कैसी स्थिति थी आप भलीभांति परिचित होंगे। भारत में 20-30 वर्ष पहले की लिंगानुपात की बात करें तो वह लड़कों की तुलना में लड़कियों का काफी कम होता था। लड़कियों की कोई वैल्यू नहीं होती थी। कन्या भ्रूण हत्या की जाती थी। बेटी पैदा होने पर उस माँ को भी छोड़ दिया जाता था।

National Daughters Day: समाज में स्त्री की कहीं कोई इज्जत नहीं थी। स्त्री को सच में पैर की जूती के समान देखा जाता था। लेकिन आज समय कुछ बदल गया है आज लोग बेटियों को भी उतना ही मान लेते हैं। जितना वह अपने बेटों को देते हैं। बेटियों को अपना कलेजे का टुकड़ा बनाकर रखते हैं। हर क्षेत्र में बेटियां अपना हुनर दिखा रही है। चाहे खेलकूद हो या शिक्षा क्षेत्र हो वह बड़ी से बड़ी नौकरी हासिल करती है। आज बेटियां चांद तक पहुंच गई है हर कार्य कर सकती है।

यह लाइन तो सुनी ही होगी ना, कि बेटा भाग्य से पैदा होते हैं और बेटियां सौभाग्य से।


बेटियां अपने साथ पूरे परिवार की किस्मत बदल देती है। उन्हें खुला आसमान दिया जाए तो वह ऊंची उड़ान भर सकती है। 1 बेटियां ही होती है जिसके दिल में सबके लिए प्यार होता है। चाहे वह मायका हो या ससुराल। दोनों घरों को बांध कर रखती है। बेटों से ज्यादा बेटियां अपने माता पिता और परिवार की परवाह करती है।

National Daughters Day: बेटियां आज किसी भी बात पर बेटों से कम नहीं है। उनकी शिक्षा-दीक्षा अगर अच्छे से की जाए तो वह हर मुश्किल को पार कर के माता पिता का नाम रोशन कर सकती है। वैसे बेटियों को एक दिन सेलिब्रेट करना संभव नहीं है। फिर भी यह एक दिन बनाया गया है। इस दिन बेटियों को विशेष रुप से सेलिब्रेट किया जाता है।

National Daughters Day: आज उन्हीं बेटियों को प्यार जताने का दिन है। इसे राष्ट्रीय बेटी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

National Daughters Day यह दिन खासकर बेटियों के लिए हैं। मां-बाप अपनी ऐसी बेटियों के लिए खुश होते हैं। जिन्होंने बेटी होकर कुछ अलग करके दिखाया है और अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है डॉटर्स डे उन्हीं के लिए मनाया जाता है।

आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि डॉटर्स डे कब और क्यों मनाया जाता है इसके इतिहास के पीछे क्या कहानी है इसकी कब शुरुआत हुई है।

फ़िल्मी दुनिया के कारण बेटी के जन्म पर, होते है माँ बाप दुःखी। दहेज प्रथा || Supreme Knowledge

National Daughters Day: राष्ट्रीय बेटी दिवस कब मनाया जाता है?

National Daughters Day : राष्ट्रीय बेटी दिवस हर साल सितंबर के चौथे रविवार को बेटी दिवस के रूप में मनाया जाता है। में यह 25 सितंबर को मनाया जा रहा है।राष्ट्रीय बेटी दिवस इसीलिए मनाया जाता है ताकि भारत में जो लिंगानुपात की समस्या है उसकी तुलना में महिला का लिंगानुपात काफी कम है इसको समान किया जा सके।

National Daughters Day: राष्ट्रीय बेटी दिवस क्यों मनाया जाता है?

National Daughters Day: समाज में बेटियों को बराबर का अधिकार और सम्मान मिले दहेज और अन्य कुरीतियों को समाप्त किया जा सके। कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सके। महिलाओं के साथ जो अत्याचार उत्पीड़न होते हैं उनको भी रोका जा सके। महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाता है। महिलाओं के हौसले बुलंद करने के लिए बेटी दिवस मनाया जाता है।


Daughter’s Day सरकार अपनी कोशिश कर रही है लेकिन एक संत है उनका नाम रामपाल जी महाराज है। उनके लाखों, करोड़ों अनुयायी है। जो व्यक्ति उन से नाम उपदेश लेते हैं वह हर तरह की बुराई छोड़ देते हैं पूरी तरह से।
National Daughters Day: सभी तरह की बुराइयों के साथ-साथ कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, बेटी और बेटा में भेदभाव यह सभी बुराइयां भी दूर हो गई है। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने सभी बुराइयां छोड़ दी है।
सबसे खास बात यह है कि दहेज प्रथा को समूल नष्ट कर दिया है। बिना दहेज के उनके अनुयाई अपनी बेटियों की शादी करते हैं और वह अपनी जिंदगी में बहुत खुश रहती है। खुशहाल जिंदगी जीती है।

National Daughters Day: बेटियों के लिए एक दिन विशेष मनाया जाता है। यह विभिन्न देशों में अलग-अलग दिन मनाया जाता है लेकिन विश्व बेटी दिवस 28 सितंबर को मनाया जाएगा। यानी मंगलवार को, सितंबर माह के चौथे मंगलवार को (विश्व बेटी दिवस) International Daughters Day मनाया जाता है।

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बिटिया दिवस पर शायरी कविता कोट्स

Daughter’s Day 2021 Shayari Poem Quotes Massage Wishes

1: बिटियां नहीं होती बेटों से कम, जब वो भरती हैं दम

जिन्होंने समझा उन्हें कम, एक हुंकार से निकाल दे दम

2: बिटिया रानी बड़ी सियानी, घर की लाज हमेशा इसे बचानी

पूरे परिवार का बोझ उठती, मम्मी, अम्मी, दादी नानी कहलाती

3: जो मानते हैं बेटियों को पराया धन, उनका घटता हमेशा मान

बेटियां होती हैं घर का मान, बढ़ती हमेशा परिवार की शान

4: बेटी होती हैं पापा की लाडकी, कभी न करती मनमानी

हमेशा बात है बिटिया ने मानी, चाहे कोई भी हो परेशानी

5: बेटी से बढ़कर नहीं है कोई, समय आने पर धर ले रूप कोई

कभी चंडी, कभी काली, कभी दुर्गा, तो कभी अन्य देवी होई

National Daughters Day: आपने देखा होगा बेटियों को पुराने समय में समान अधिकार नहीं मिला करते थे। उन्हें बोझ माना जाता था। इसका मुख्य कारण है दहेज प्रथा।

1.माता-पिता के मन में यह रहता था कि बेटी होगी तो उसकी शादी करने के लिए इतना भारी भरकम दहेज कैसे देंगे दूसरी बात उसकी सुरक्षा के लिए हमेशा हमें फिकर करनी होगी।
2.इसने कहीं कुछ गलती कर दी या इसके साथ किसी ने कुछ गलत कर दिया तो भी बेटी है इसीलिए हमारी ही नाक कटेगी। यह भी समाज की गलत धारणा है जो समाज में व्याप्त थी।
3.पाल पोस कर बड़ा करेंगे और किसी और के घर चली जाएगी वह तो पराया धन है हमारी नहीं है। यह गलत धारणा थी।

4. बुढ़ापे में रोटी तो बेटा ही देगा हमारा वंश बेटा ही आगे बढ़ाएगा। बेटी क्या काम की है गलत धारणा थी।

National Daughters Day: महिलाओ की स्तिथि मे सुधार

National Daughters Day: धीरे-धीरे समय बदलता गया लोगों में जागरूकता आने लगी। लिंगानुपात महिलाओं का बहुत कम था। सरकार ने इसके लिए कई सकारात्मक कदम उठाए और धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगा। आज आप देख सकते हैं। हमारे समाज में बेटियों की स्थिति काफी अच्छी है। लेकिन जितनी होनी चाहिए उतनी अच्छी नहीं है हमें अभी भी सकारात्मक कदम उठाते रहना है समाज को जागरूक करना है ताकि स्त्री और पुरुष को बराबर सम्मान मिले बराबर अधिकार मिले।

National Daughters Day: एक निवेदन

आज की युवा बेटियों से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि एक तरफ बेटियां अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही है। अच्छे कार्य कर रही है। अंतरराष्ट्रीय खेल कूद में हिस्सा लेकर, मेडल लाकर देश का नाम रोशन कर रही है।


National Daughters Day: वहीं दूसरी ओर आजकल देखने में आ रहा है कि सोशल मीडिया पर लड़कियां फेमस होने के लिए कुछ भी वाहियाद करने लगी है। अश्लील नृत्य करने लगी है। ऐसी लड़कियों को देखकर शर्म आती है यह अपनी छूट का गलत फायदा उठा रही है। लड़की के साथ कोई लड़का गलत हरकत करता है। तो लड़के को गलत ठहराया जाता है लेकिन कुछ लड़कियां ऐसी हो रही है। जिसमें उनकी ही गलती होती है।

National Daughters Day: जो सरेआम समाज को अपने शरीर का प्रदर्शन करती हैं। समाज का माहौल खराब करती हैं। स्त्री और पुरुष बराबर है लेकिन ऐसी हरकतें करके वह महिलाओं का सिर शर्म से झुका देती है।

National Daughters Day: इन लड़कियों से इन महिलाओं से प्रार्थना है कि ऐसी हरकतें ना करें। बेटा और बेटी सभी बराबर है इस छूट का सही उपयोग करें। अपने माता-पिता का नाम सही तरीके से रोशन करें। उनके मां-बाप को उन पर फक्र हो।

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